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आंध्रप्रदेश ने ताइवानी कंपनियों के साथ ₹18,400 करोड़ के निवेश समझौते किए
लेखक: आदित्य श्रीवास्तव / इंडो-पैसिफिक पॉलिटिक्स आंध्र प्रदेश सरकार ने ताइवान से जुड़ी कंपनियों से लगभग ₹18,400 करोड़ के निवेश प्रतिबद्धताओं की घोषणा की है, जिनके माध्यम से एक उन्नत बैटरी विनिर्माण परिसर और एक भारत-ताइवान औद्योगिक पार्क की स्थापना की जाएगी। इन निवेशों से राज्य को उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उद्योगों के…
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ताइवान चाहता है भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: रणनीतिक महत्व और क्षेत्रीय प्रभाव
लेखक: आदित्य श्रीवास्तव/द इंडो-पैसिफिक पॉलिटिक्स पृष्ठभूमिभारत-ताइवान संबंध 1990 के मध्य से धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं, जो आर्थिक सहयोग, व्यावहारिक साझेदारी और वन-चाइना नीति के तहत शांतिपूर्ण कूटनीति के माध्यम से मजबूत हुए हैं। जबकि भारत ताइवान को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता, दोनों पक्ष प्रतिनिधि कार्यालयों के माध्यम से संपर्क बनाए रखते हैं:…
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विशेष वार्ता: 2025 में भारत के लिए ताइवान क्यों महत्वपूर्ण है?
साक्षात्कारकर्ता:वीनस उपाध्याय/अनुवादक:आदित्य श्रीवास्तव जाबिन टी. जैकब शिव नादर विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं प्रशासनअध्ययन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हिमालयन स्टडीज़ केनिदेशक भी हैं। वे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज़ स्टडीज़ में फेलो और सहायक निदेशक रह चुके हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़…
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तियानजिन एस.सी.ओ के बाद: चीन की दृष्टि में भारत कहाँ फिट बैठता है?
लेखिका: वीनस उपाध्याय/ अनुवादक: आदित्य श्रीवास्तव तियानजिन एससीओ का समय संयोगवश ऐसे समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगा दिया था—मोदी के चीन शिखर सम्मेलन में पहुँचने और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के मात्र तीन दिन पहले। काफी चर्चा है कि चीन, अमेरिका के शुल्क…
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भारतीय नृत्य और संस्कृति के लिए समर्पित ताइवानी महिला
लेखक: वीनस उपाध्याय/ अनुवादक: काश्वी चतुर्वेदी बीस साल पहले जब हुआंग मेयू अकेले नई दिल्ली आईं बॉलीवुड नृत्य सीखने, तो उन्हें अक्सर कॉनॉट प्लेस की दीवारों पर लगे ‘गुमशुदा’ पोस्टरों पर अपना चेहरा दिखाई देने का डर था। बीतते समय के साथ, आज वे एक प्रशिक्षित ओडिसी नर्तकी बन चुकी हैं, जिनका ताइपे में एक…
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मुंबई से GIFT सिटी तक: ताइवानी बैंक बदल रहे भारत में अपनी रणनीति
लेखक: आदित्य श्रीवास्तव / इंडो-पैसिफिक पॉलिटिक्स रिपोर्टर ताइवान के दो प्रमुख वित्तीय संस्थान, ताइपे फुबोन कमर्शियल बैंक और सीटीबीसी बैंक, भारत के बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT सिटी) में शाखाएं खोलने की योजना बना रहे हैं। यह भारत और ताइवान के बीच बढ़ते आर्थिक और वित्तीय सहयोग…
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भारत और ताइवान के लिए सांस्कृतिक कूटनीति
डॉ. सम्पा कुंडू द्वारा/अनुवादक:काश्वी चतुर्वेदी सांस्कृतिक कूटनीति भारत और ताइवान के लिए रणनीति-संबंधी, सॉफ्ट पावर और पहचान से जुड़े कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमित राजनीतिक-राजनयिक संबंधों के कारण यह भारत-ताइवान द्विपक्षीय संबंधों में एक अहम तत्व के रूप में उभरी है। इस संदर्भ में सांस्कृतिक कूटनीति एक शक्तिशाली, कम जोखिम और अधिक प्रभाव वाला…
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हांगकांग की तरह ताइवान की कोई ‘अंतिम तारीख’ नहीं है, चीन की एकीकरण की इच्छा ‘समस्याग्रस्त’ है: अमेरिकी विशेषज्ञ
वीनस उपाध्याय द्वारा/ अनुवादक:काश्वी चतुर्वेदी रवि बत्रा न्यूयॉर्क स्थित एक प्रसिद्ध अमेरिकी वकील हैं और 2007 में कैपिटल हिल में शपथ लेने के बाद से दक्षिण एशियाई मामलों की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के लंबे समय से अध्यक्ष हैं। वे 2015 से 2021 तक यूक्रेन के क़ानूनी सलाहकार रहे और उनकी लॉ फर्म, द लॉ फर्म…
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ताइवान तक भारत की रणनीतिक पहुंच: एक संतुलित, स्वतंत्र साझेदारी
लेखकः प्रो. (डॉ.) निशाकांत ओझा/ अनुवादक: आदित्य श्रीवास्तव भारत और ताइवान के बीच उभरते संबंधों ने वैश्विक स्तर पर गंभीर ध्यान आकर्षित किया है। जो सहयोग पहले केवल अनौपचारिक आर्थिक और शैक्षणिक संपर्कों तक सीमित था, वह अब व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, श्रम गतिशीलता और गोपनीय रणनीतिक संवाद जैसे विविध क्षेत्रों में फैल गया है। हालांकि…